Women : A Great Warrior ( महिलाएं : एक अनकही योद्धा )

बचपन की यादें ( भाग -5 )


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तेरे माथे पर यह आंचल बहुत ही खूब है। 


"महिलाओं के रूप में हम क्या कर सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है।"

मिशेल ओबामा

                   आज वह मुट्ठी खुल चुकी है ,जो सदियों से बंद थी।  इस मुट्ठी में कई सपने हैं जो स्वयं तक ही  सीमित नहीं है ,बल्कि यह सपने अपने गर्भ में छिपाए रखती हैं क्योंकि यह सतरंगी इन्द्रधनुष हैं , उम्मीदों का हौसला है ,जमाने को बदलने का इरादा है हर खालीपन को खुशियों से भरने का एक लंबी उड़ान है।
                  स्त्रियों की खुली मुट्ठियाँ  जब थाम लेती हैं एक दूसरे का हाथ और ठान  लेती हैं कुछ कर गुजरने को तो यकीन मानिए  उनके लिए इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं रह जाता ।

यह कहानी मेरी यादों की सफर में एक ऐसी कड़ी है जो मुझे अक्सर याद दिलाती है कि इसे औरों के साथ साझा  करने की प्रेरणा देती  हैं ।

मेरी एक सीनियर थी जो काफी खूबसूरत थी और पढ़ने में भी काफी अच्छी थी , उनकी आवाज में एक खनक सी  थी , जो सुनने  में काफी सुरीली और मीठी  थीं  ।
 उनका नाम लेते मुझे अक्सरअमेरिकन अभिनेत्री (लोरेटो यंग)का कथन याद आ जाता है जो उन पर बिलकुल  सटीक बैठता है-

"खूबसूरत स्त्री खुद अपनी अनुयाई होती है
यह किसी भीड़ की हिस्सा नहीं बनती।"

जब मैं फाइनल ईयर में थी तो उनके शादी की खबर सुनने को मिला तो मैं काफ़ी अचंभित हो  गई थी कि इतनी जल्दी शादी क्यों ? अभी तो उसे  और पढ़ाई करनी थी , उन्हे कई सफलताये पानी थी। मैं उनके लिए जाने क्या क्या सोचने लगी , मुझे उस समय मानो ऐसे लगा कि जीवन रुक सा गया हो। 
मेरा  मन सवालों से घिरा हुआ था कि क्या एक लड़की शादी के लिए ही जीती है ? क्या उनके  लिए शादी ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य होता है। 

ये समाज के कई ऐसे खोखले नियम है जो स्त्रियों के पैरो में बेड़िया तो डाल देते है ,किन्तु अगर स्त्री अपने जीवन कुछ करने की  इरादा बना ले तो मुझे लगता है स्वयं ईश्वर भी मंजिल पे हाथ फैलाए इंतजार करते है। 

स्त्रियाँ अपने जीवन में एक छोटी उम्र से ही कितनी जिम्मेदारियों को निस्वार्थ निभाती हैं। किन्तु  ये समाज कोई मौका नहीं छोड़ता उन्हें अपना हुनर दिखने से रोकने में। एक बेटी जो अपने जीवन में पुत्री, पत्नी ,माँ आदि रूपों में ईश समाज को सजोने में लगी रहती हैं , अपनी इच्छाओ को दबा के दुसरो के लिए अपनी पूरी जिंदगी बिता देती हैं। 
 आखिर समाज है क्या ? समाज हमसे ही तो मिलके बना हैं। फिर हम खुद के बेटियो लिए बेड़िया क्यों बना के रखे हैं ? हमें  इन बातो पे गौर करना चाहिए। 

पुराने समय में गृहस्ती की  छोटी  चार दिवारी का  दायरा ही एक महिला के जीवन की परिधि होती थी।  मैं इन बातो को लेकर कई दिनों तक में सोचती रही।  यह भी सोचती थी कि एक हाउसवाइफ जो घर के कामकाज को संभालती है , उसके पास घर में लिए जाने वाले  किसी निर्णय पर उसकी कोई सहमति होती है की नहीं ?

आज कई वर्षों बाद मेरे इन प्रश्नों का जवाब मुझे बहुत अच्छी तरीके से मिल गया, अचानक उनसे कई अरसो के बाद  उनसे  मेरी बात हुई। उनसे बात करके मेरे पुराने दिनों की यदि तजा हो गई थी। 
 
 मुझे तो ऐसा लग रहा था कि  ये  खूबसूरत अल्फाज उनके लिए ही बने हैं-

"तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है पर इस आंचल से अगर परचम बना लेती तो ही  अच्छा था। "

उन्होंने अपनी समर्पण से अपनी  बेटी को इतने अच्छे तरीके से संवारा कि पहले ही प्रयास में मेडिकल की परीक्षा में  सरकारी सीट प्राप्त कर ली , जो की बहुत कठिनाईयों से लाखो में एक को मिले । मेरी उनसे काफी देर तक उनसे  बाते  चली और मुझे बहुत ख़ुशी का अनुभव हो रहा था। 

                    उसने नवी कक्षा तक बेटी को किसी  भी प्रकार का ट्यूशन के लिए नहीं भेजा था और साथ ही साथ उनके पति भी नौकरी के वास्ते हमेशा ट्रांसफर होते रहे।  इन परिस्थितियों में भी अकेले ही गुजरात के वडोदरा शहर में स्थाई रूप से रहते हुए मेडिकल परीक्षा से पूर्व मात्र 1 महीने की तैयारी के लिए बेटी को कोचिंग भेजी। आज बेटी भोपाल के ऐम्स से मेडिकल कर रही है। बेटा 10 दसवीं कक्षा में है। मेरे सभी प्रश्नों का हल मुझे अचानक ही मिल गया ।

 "जो अपने  कदमो की काबिलियत पे विश्वास  रखते हैं
  मंजिल हमेशा उन लोगो का इंतजार करती हैं  "

                            मुझे नहीं मालूम कि मैं इस सिलसिले को आगे कहां तक ले जाने में सफल हो सकूगी ,लेकिन एक बात जरूर है कि मै ऑफिस के 8 घंटे बिताने के बाद वक्त ही गिना हुआ  बचता है और जो बचता भी है तो वह इस अपराध बोध में बच्चों के साथ बिताती हूं कि नौकरी के लिए दिया गया वक्त बच्चों के हिस्से में की गई कटौती है।
                        स्त्रीया अपने जीवन में हमेशा ही संघर्ष करती आई  हैं। आज जब उनके बारे में सोचती हूं तो मुझे यह सोच के गर्व महसूस होता है कि अपने लिए तो सब कोई जीता है औरों के लिए अपने जीवन को न्यौछावर करना ही सबसे बड़ा त्याग है। एक डॉक्टर उनकी बेटी होगी , मगर इस दुनिया को उन्होंने कितना बड़ा उपहार  दिया वो एक बहुत बड़ी बात हैं। शायद समाज इसके बारे में कभी न सोचें , किन्तु हमें इस वास्तविक घटना से खुद को बदलना चाहिए। क्यों कि  डॉक्टर बनाने के लिए कितने मां-बाप  अपने बच्चो के प्रति कितने ख्वाब देखा करते हैं।  कितने पैसे खर्च करते हैं उसके बावजूद भी  बच्चों को सीट नहीं मिल पाती  है। 

"Girls present is future of our generation."


आज इस सोशल प्लेटफार्म  ने इस याद को शेयर करने का अवसर प्रदान किया। मेरा अपना , अपना आप ढूंढ कर दिया और एक ऐसा फलक दिया जहां मैं स्वयं को अभिव्यक्त कर पा रही हूं, उम्मीद करती हूं कि मेरी यह यादों का सफर आप सभी को पसंद आएगी। 

कृपया इसे साँझा कर औरो  तक पहुचाये ताकि समाज के हर लोग  इन  पहलुओ से रूबरू हो पाए।


धन्यवाद  


(In English)
तेरे माथे पर ये आँचल बहुत ही खूब हैं। 
(TERE MATHE PE YE ANCHAL BAHUT HI KHUB HAI )

"There is no limit to what we can do as women."
Michelle Obama

Today the strong fist of women has opened, which were closed for centuries. There are many dreams in this fist which are not limited to themselves, but these dreams are hidden in their womb because it is a colorful rainbow, the expectation is there, the intention is to change the time, a long flight to fill every emptiness with joy.

                  When the open fists of women hold each other's  and decide to pass on something and believe then nothing is impossible in this world for them.

This story is a link , in my journey of memories that often reminds me and always inspires me to share it with others.

I had a senior who was very beautiful and was also very good in study, had a twinkle in his voice, which was very melodious and sweet in hearing.

Thinking of her name, I often remember a statement of the American actress ( Loreto Young) who fits them exactly -

"Beautiful woman follower of herself, 
she does not become part of any crowd. "

When I was in the final year, suddenly hear the news of her marriage, I was quite shocked as to why she was getting married so soon? but she could study more, she could get many successes in her life. I started thinking about her ,how many success she could achieve, I felt like my life had stopped.

My mind was surrounded by questions whether a girl lives for marriage? Is marriage is the only goal of life for them?

These are many such hollow rules of society that put chain in the feet of women, but if a woman makes an intention to do something in her life, then I think even God himself waits for her with opening his hands.

From a very young age, women carry out so many responsibilities selflessly in her lives. But this society does not leave any chance to stop them from showing their skills . A girl who is busy in her life in the form of daughter, wife, mother, etc. in society, suppresses her desires and spends her whole life for others.

 What is this society after all? The society is made of none other than us only. Then why do we make boundaries for our own daughters? We should consider these things and think about it.

In the old days, the little spaces of the houses was the circumference of a woman's life. I kept thinking about these things for several days. It was also coming as a thought that a housewife who handles the house-works has any consensus on decisions taken in the house or not?

Today after many years, I got a very good answer to my questions, suddenly after several years, I spoke to him. If talking to them, my old days were refreshed.

It seemed to me that these beautiful words were made only for her -

"This 'Aanchal ' looks very beautiful on your forehead, but you could have made it a victory flag, like the shining sun.""

With her dedication and hard-work, she groomed her daughter so well that in the first attempt, she got a government seat in the medical examination .This type of success we achieve one in lakhs with to many difficulties. I kept talking to him for a long time and I was feeling very happy .

I find that she did not send her daughter for any kind of tuition till ninth class . At the same time, her husband was not with her due to having transferable job. Even under these circumstances, living alone in Vadodara city of Gujarat sent coaching to the daughter for preparation  just for 1 month before the medical examination. Today the daughter is doing medical from AIIMS, Bhopal. His son  is in tenth grade. Knowing all these things about her ,I suddenly got the answers to all my questions.

"Those who believe in the ability of their steps
  destination always waits for such people "

                            I do not know how far I will be able to take this journey , but one thing is sure that after spending 8 hours in the office, time remains to be counted, and whatever remains, I spend with them in guilt of children that the time given for the job is the time reduced from  the share of children.

Women have always struggled in their lives for many things. Today, when I think about them, I proudly think that everyone lives for themselves, and one who sacrificing their life for others dreams,  is the biggest sacrifice. 

A doctor will be her daughter, but what a great gift she gave to this world is a very big thing. Perhaps society should never think about it, but we should change ourselves from this real life story. Because how many parents see so many dreams towards their children to make a doctor. Despite how much money they spend, children do not get success.The children don't gets success ,there are so many reasons we will discuss it later.
I would say:

"Girls present is the future of our generation."

Today this social platform provided an opportunity to share this memory. I found myself, gave myself a pen where I am able to expressing my thoughts in thinking of we can learn some good and change the world. I am hoping that you will like this journey of my memories.

Please share this and reach out to others so that every person of the society can meet these aspects.


Thank you

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