STORY OF ENCOURAGEMENT

 Story of The group of frogs

We take many decisions in our life that are inspired by others life. Obviously before taking any decision, we should consider the views of others like family ,close friends ,teachers etc. which   helps us to take the right decision in our life. But I think there is a important point we should understand before follow these things.

I am remembering a story that is based on how much we get influenced by the words of others and forget to use our brain to solve the problem. We should focus only on good words comes from others.

Once upon a time, a swarm of frogs were wandering in search of a new place to dry up the pond. Even after wandering for a long time, he did not find any pond, he made sure that he would stay for some time and rest. Two of the frog's children mischievously fell into a deep pit, their mother very upset to see this. He called for help  and asked what to do to save my children.

Everyone started giving the opinion that this pit is very deep, we cannot remove and even if they try, they cannot leave ,they will die in there.

Hearing this, frog's mother became very disappointed and looked quietly and towards her children.

The frog's children were constantly trying to come up, but were falling. One of the frog's children, after listening to the people, believed and he stopped trying now while the other child did not stop trying.

The frog's children were constantly jumping and trying to come up, but they were failing to come outside. One of the frog's child, after listening to the people, believed and he stopped trying and fall down in deep pit. while the other child did not stop trying to come outside.

Eventually he managed to come out and his mother was very happy, but the second child didn't make out to come outside and died in there.

All the frogs started to wonder, how did it get out?

The frog's mother told the swarm that this child is deaf, cannot hear anything. It felt that all the people had been standing here and encouraging me that you could come outside and I kept trying and became successful .

Here we see carefully on the situation that we are very much influenced by what other say or what other think about us. These things are good for us as long as they are positive, if these things are negative then we start failing to achieve our goal. 

One of the children of the frog was negatively affected by the talk of others and lost his life. Whereas, because of not listening to a child, he started encouraging people about the matter and he kept trying and became successful.

Moral of the story

From this story, we learn two things,

1. We should keep always positive attitude to face difficulties in our life and the courage to not give up.

2- We should not learn from blind thoughts or negative words of others by closed eyes. We should always take decisions by understanding and thinking about it.

I hope this story sends you a good message and helps you to understand how we can help with our words to help others as well as ourselves. I believe that we can change the world with our good.

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इसे हिंदी में पढ़ें। 

मेंढक के समूह की कहानी

अपने जीवन में बहुत ऐसे निर्णय ले लेते हैं जो दूसरे द्वारा बताए गए होते हैं। कोई भी निर्णय लेने से पहले हमें दूसरों के विचारों पर गौर करना चाहिए जोकि हमें सही निर्णय लेने में सहायता करती है।

मुझे एक कहानी याद आ रही है जो इसी बात पर आधारित है की हम दूसरों की बातों से कितना प्रभावित हो जाते हैं और अपना मस्तिष्क का प्रयोग करना ही भूल जाते हैं। दूसरों से हमें सिर्फ अच्छी बातों पर ही ध्यान देना चाहिए।

एक बार की बात है मेंढ़कों का झुंड का झुंड तालाब सूख एक नई जगह की तलाश में घूम रहे थे। बहुत देर घूमने पर भी उन्हें कोई तालाब नहीं मिला वेे निश्चित किए की कुछ देर वह एक जगह रुक कर विश्राम करेंगे। मेंढक के दो बच्चे शरारत करते हुए एक गहराई वाले गड्ढे में गिर गए , उनकी मां यह देख कर बहुत परेशान हो गई। उसने सभी मेरे को को बुलाया और पूछा क्या किया जाए, मेरे बच्चों को बचा लीजिए।

सभी राय देने लगे कि यह गड्ढा काफी गहरा है हम निकाल नहीं सकते और अगर वह कोशिश भी करते हैं तो निकल नहीं सकते।
यह सुनकर मेडिको की मां बहुत निराश हो गई और चुपचाप और अपने बच्चों की तरफ देखने लगी।

मेंढ़क के बच्चे लगातार ऊपर आने की  कोशिश कर रहे थे ,लेकिन गिर का रहे थे।उनमें से एक मेंढ़क का बच्चा लोगो की बात सुन के विश्वास कर बैठा और वो अब कोशिश करना बंद कर दिया जबकि दूसरे बच्चे ने अपनी कोशिश बंद नहीं की।

अंततः वो बाहर आने में कामयाब हो गया और उसकी मा बहुत खूब हुए लेकिन दूसरा बच्चा हर मांन चुका था।

सारे मेंढ़क  आश्चर्य से पूछने लगे कि ये बाहर कैसे निकाल गया ?
मेंढ़क की मा ने बताया कि ये बच्चा बेहरा है ,ये सुन नहीं सकता।
इसे लगा की सारे लोग के रहे थे कि तुम ऊपर आ सकते हो और वो कोशिश करता रहा और सफल हो गया।

यहां हम गौर से सोचे तो पाते है कि हम दूसरो के बातो से हम बहुत  ज्यादा प्रभावित होते है । ये बाते तब तक हमारे लिए  अच्छी होती है जब तक ये अच्छी होती है, अगर ये बाते नकारात्मक होती है तो हम अपने लक्ष्य को पाने में असफल होने लगते है।मेंढ़क का  एक बच्चा  दूसरों की बात से नकारात्मक रूप में प्रभावित हुआ और हार गया, जबकि एक बच्चा ना सुनने के कारण वो लोगो के बात उस हौसला बढ़ाने वाले लगे और वो कोशिश करता रहा और सफल हो गया।

कहानी से सीख :

इस कहानी से हम दो बातो को सीखते है :

१- हमें कठिनाइयों में भी सकारात्मक्ता और हार ना मानने का हौसला रखना चाहिए।

२- हमें दूसरों की बातों पर विचा रो को आंख बंद कर के नहीं माननी चाहिए।हमेशा हमें अपनी सोच समझ के निर्णय लेना चाहिए।

मुझे आशा है कि यह कहानी आपको एक बहुत अच्छा संदेश भेजेगी और आपको यह समझने में मदद करेगी कि हम अपने अच्छे और सही शब्दों के प्रयोग से दूसरों के साथ-साथ खुद की कैसे मदद कर सकते हैं। मेरा मानना है कि हम सब अच्छा करके दुनिया को बदल सकते हैं ।

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